जब से आप यहाँ नहीं,
मायूसी सी छा गई।
हरपल आपकी याद,
दिल को सताती रही।
आपके साथ की हुई लड़ाई,
आज भी मन को भाई।
मम्मी थी हैरान, करते थे परेशान,
मिल बाँट कर खा जाते थे सुनी हुई सारी डांट ।
एक कान से सुन लेते थे , दुसरे में न जाती,
मिलते थे एक बार फिर करते खींचातानी ।
मम्मी कहती रहो अलग-अलग,
पर दो घंटे बाद होते एक-दुसरे के समक्ष।
जब भी कुछ टूटा ,हो गए एक,
बात बीतते ही एक के हो गए टुकड़े अनेक।
आपकी सरदार की लीला ,
लगती थी एक क्रीड़ा ,
होती थी थोड़ी पीड़ा ,
जुददे के फेर में फंसता था मुझ जैसा एक अनोखा कीड़ा।
अब तो बस इन्हीं बातों को याद करते रहता हूँ ,
इन्हीं यादों के संग दिल को संजोये रखता हूँ।
आपको जन्मदिन का उपहार तो न भेज सका,
बस इन्हीं चंद यादों का पैगाम बिछा सका।
बस यही दुआ करता हूँ,
आप जहाँ भी रहो, जहाँ भी जाओ,
खुशियों का समंदर समेटे हुए पाओ।
Tuesday, February 17, 2009
Monday, February 16, 2009
कश्मीर तो हमारा है
दो देश द्वेष में भिड गए,
लाशों का ढेर कर गए।
कहीं था बवंडर तो कहीं थी आंधी ,
बस यूहीं चल रही थी दो देशों की कहानी ।
पर तभी आया एक भूचाल , मच गया तूफान,
तबाही का मंजर , समाया दिल के अन्दर।
पाकिस्तान ने कश्मीर को तबाह करने की ठानी,
पर पड़ी उसे भारतवासियों से मुँह की खानी।
पाकिस्तान के एक हिस्से ने किया कश्मीर पर वार,
पर भारत के हर हिस्से में गूंज गई आवाज।
पाकिस्तान ने जवाब दिया एक बार फिर हाहाकारी से,
पर हिंदुस्तान ने किया नतमस्तक एक बार फिर दिलदारी से।
बहुत समझाया , बहुत चेताया ,पर पड़ी थी उन्हें कश्मीर की
अंत में निर्णय लिया "जैसा को तैसा" देने की।
अरे! कश्मीर तो हमारी मोहब्बत है, चाहत है, जन्नत है,
दिलों में बसा हुआ संसार है ,
अरे! हमारी भारतमाता का मस्तक है,
जिस दिन यह मस्तक अलग हुआ , संपूर्ण शरीर समाप्त हुआ ।।।
लाशों का ढेर कर गए।
कहीं था बवंडर तो कहीं थी आंधी ,
बस यूहीं चल रही थी दो देशों की कहानी ।
पर तभी आया एक भूचाल , मच गया तूफान,
तबाही का मंजर , समाया दिल के अन्दर।
पाकिस्तान ने कश्मीर को तबाह करने की ठानी,
पर पड़ी उसे भारतवासियों से मुँह की खानी।
पाकिस्तान के एक हिस्से ने किया कश्मीर पर वार,
पर भारत के हर हिस्से में गूंज गई आवाज।
पाकिस्तान ने जवाब दिया एक बार फिर हाहाकारी से,
पर हिंदुस्तान ने किया नतमस्तक एक बार फिर दिलदारी से।
बहुत समझाया , बहुत चेताया ,पर पड़ी थी उन्हें कश्मीर की
अंत में निर्णय लिया "जैसा को तैसा" देने की।
अरे! कश्मीर तो हमारी मोहब्बत है, चाहत है, जन्नत है,
दिलों में बसा हुआ संसार है ,
अरे! हमारी भारतमाता का मस्तक है,
जिस दिन यह मस्तक अलग हुआ , संपूर्ण शरीर समाप्त हुआ ।।।
Sunday, February 15, 2009
बढे चलो
जिंदगी में ऊचायिओं को छूने का जज्बा तुम रखो ,
जिंदगी में कुछ कर गुजरने की तमन्ना तुम रखो ।
ना सर झुकाना ,
ना गिडगिडाना ,
सिर्फ़ आगे ही बढ़ते ही जाना।
जिस दिशा में एक बार कदम बढ़ा दिए तुमने,
उस दिशा में प्राप्त कर फतह ही लौटना होगा तुम्हें।
चाहे पथ पर चलते हुए पैर दुखते रहें,
लेकिन तुम न रुकना उस पल जिससे दीप जलते रहें ।
दीपक की भांति प्रज्जवलित रहना होगा तुम्हें,
अंधकार को स्वतः ही समाप्त करना होगा तुम्हें।
दुनियावालों को दिखाना होगा तुम्हें,
कि दुनिया जीती जाती है कर्मों से, भला भाग्य से कहाँ।
जिंदगी में कुछ कर गुजरने की तमन्ना तुम रखो ।
ना सर झुकाना ,
ना गिडगिडाना ,
सिर्फ़ आगे ही बढ़ते ही जाना।
जिस दिशा में एक बार कदम बढ़ा दिए तुमने,
उस दिशा में प्राप्त कर फतह ही लौटना होगा तुम्हें।
चाहे पथ पर चलते हुए पैर दुखते रहें,
लेकिन तुम न रुकना उस पल जिससे दीप जलते रहें ।
दीपक की भांति प्रज्जवलित रहना होगा तुम्हें,
अंधकार को स्वतः ही समाप्त करना होगा तुम्हें।
दुनियावालों को दिखाना होगा तुम्हें,
कि दुनिया जीती जाती है कर्मों से, भला भाग्य से कहाँ।
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